कंप्यूटर क्या है ? इसके प्रकार एवं विशेषताएं इसकी परिभाषा, अर्थ और कार्य

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कंप्यूटर क्या है ? इसके प्रकार एवं विशेषताएं इसकी परिभाषा, अर्थ और कार्य
कंप्यूटर क्या है ? इसके प्रकार एवं विशेषताएं इसकी परिभाषा, अर्थ और कार्य
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संसार में शायद ही कोई ऐसा पढ़ा – लिखा इन्सान होगा, जिसने कंप्यूटर का नाम नहीं सुना होगा. ज्यादातर इन्सान कंप्यूटर को एक ऐसी मशीन मानते हैं, जो सब कुछ कर सकती है . हालांकि यह कहना तो सही नहीं होगा कि कंप्यूटर सब कुछ कर सकता है , परन्तु इसमें संदेह नहीं कि वह बहुत कुछ कर सकता है और वह भी बहुत तेजी से तथा सही – सही . यही कारण है कि आज की दुनिया में कंप्यूटरों की संख्या व् दुनिया बढ़ती ही जा रही है . इस पोस्ट में आप पढ़ेंगे कि कंप्यूटर वास्तव में क्या है, वह क्या – क्या काम कर सकता है और उसके द्वारा काम किस प्रकार कराए जाते हैं. कम्प्यूटर क्या है ? इसके प्रकार एवं विशेषताएं इसकी परिभाषा, अर्थ और कार्य सबसे पहले तो यह समझना जरूरी है कि कंप्यूटर (Computer) एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जैसे कि इलेक्ट्रानिक कैलकुलेटर होते हैं. कैलकुलेटरों पर हम जोड़ना, घटाना आदि अंकगणितीय क्रियाएं करते हैं, जबकि कंप्यूटर पर हम इन क्रियाओं के अलावा भी बहुत से काम करते या कराते हैं . इन काम को डाटा प्रोसेसिंग ( Data Processing ) कहा जाता है. डाटा प्रोसेसिंग को समझने और जानने के लिए डाटा को समझना जरूरी है. कंप्यूटर का परिचय और विकास

डाटा (Data) क्या है ?

डाटा (Data) क्या है
डाटा (Data) क्या है ?

किसी वस्तु के बारे में किसी तथ्य या जानकारी को ‘डाटा’ कहा जाता है, उदाहरण के लिए, जिस पेन से हम लिखते हैं, डाटा Data क्या है इसके बारे में कई जानकारियां दिया जा सकता हैं, जैसे उसका रंग, उसका वजन, उसकी कीमत, उसकी लम्बाई बनाने वाली कम्पनी का नाम आदि इसी प्रकार किसी (Student) के बारे में ये बातें जानी जा सकती हैं नाम, रोल नं., पिता का नाम, जन्मतिथि, कक्षा, लिए गए विषय, घर का पता आदि ये सभी बातें डाटा के उदाहरण हैं.

डाटा मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं-

  1. चिह्नात्मक ( Alpha – numeric )
  2. संख्यात्मक ( Numeric )

अंकों ( Digits ) से बने हुए डाटा को संख्यात्मक डाटा कहा जाता है , जैसे रोल नं ., लम्बाई, प्राप्तांक, मूल वेतन आदि संख्यात्मक डाटा में हम केवल 01 , 2 , 3 , 4 , 5 , 6 , 7 , 8 तथा 9 इन दस अंकों का प्रयोग करते हैं और इनके साथ दशमलव बिन्दु ( . ), घन ( + ) और ऋण ( – ) चिह्नों का भी प्रयोग कर सकते हैं. घटाना, जोड़ना, गुणा करना, भाग देना आदि गणितीय क्रियाएं केवल संख्यात्मक डाटा पर की जा सकती हैं. चिह्नात्मक डाटा उस डाटा को कहा जाता है जिसमें अंकों तथा अक्षरों सहित किसी भी चिह्न का प्रयोग किया जा सकता है, जैसे किसी पुस्तक का शीर्षक, घर का पता, कोई पत्र या लेख, किसी कम्पनी का नाम आदि. चिह्नात्मक डाटा पर घटाना, जोड़ना आदि गणितीय क्रियाएं नहीं की जा सकतीं है परन्तु हम उनकी जांच या तुलना ( Comparison ) कर सकते हैं. कंप्यूटर का इतिहास ? कंप्यूटर के जनक कौन थे

उपयोग के अनुसार डाटा अन्य प्रकार के भी होते हैं, जिनके बारे में आप आगे इस पोस्ट में  पढ़ेंगे. कंप्यूटर में सभी प्रकार के डाटा को पढ़ा जा सकता है, उसे स्टोर किया जा सकता है और छापा भी जा सकता है.

सूचना (Information) क्या है ?

यूं तो हमारे पास बहुत प्रकार के डाटा का भंडार होता है, परन्तु वह सारा हमारे लिए हमेशा उपयोगी नहीं होता, क्योंकि डाटा अलग – अलग बिखरे हुए अव्यवस्थित तथ्य हैं, जिनसे कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता. उदाहरण के लिए, किसी कक्षा में पढ़ने वाले लड़कों की संख्या या फिर अलग – अलग उम्र के लडको की उम्र हमारे लिए डाटा है, परन्तु हमें उस कक्षा की औसत उम्र ( Average Age ) की जरूरत है. यह हमारे लिए उपयोगी है. उपयोगी डाटा को कंप्यूटर की भाषा में ‘सूचना’ कहते है, हम डाटा इकट्ठा ही इसलिए करते हैं ताकि उसमें से सूचना निकाल सकें. इसके लिए हमें डाटा पर कुछ विशेष क्रियाएं करनी पड़ती हैं, जैसे विद्यार्थियों की अलग – अलग उम्रों में से औसत उम्र पता करने के लिए पहले हम उन सबको उम्र को जोड़ेंगे , फिर सभी विद्यार्थियों को गिनेंगे और अन्त में उम्रों के योग में विद्यार्थियों की संख्या (या गिनती) से भाग देंगे. इससे उनकी औसत उम्र निकल आएगी. अलग – अलग विद्यार्थियों की उम्र हमारे लिए केवल डाटा है .. इसकी तुलना में औसत उम्र हमारे लिए अधिक उपयोगी है, इसलिए यह सूचना है . कंप्यूटर के भागों का नाम – Computer parts Name in Hindi

 

डाटा प्रोसेसिंग (Data Processing) क्या है ?

डाटा प्रोसेसिंग (Data Processing) क्या है
डाटा प्रोसेसिंग (Data Processing) क्या है

अलग – अलग उम्र से औसत उम्र निकालने के लिए हमें जोड़ना, गिनना,  भाग देना आदि जो कार्य करने पड़े , उन्हें ‘प्रोसेसिंग’ कहा जाता है. इसी प्रकार डाटा से सूचना निकालने के लिए हमें बहुत सी क्रियाएं करनी पड़ती हैं , उन सब क्रियाओं को डाटा प्रोसेसिंग’ कहा जाता है. डाटा प्रोसेसिंग हम कागज – कलम लेकर हाथ से भी कर सकते हैं , परन्तु आजकल हम यह काम कंप्यूटर की सहायता से करते हैं . लेकिन क्योंकि कंप्यूटर एक इलेक्ट्रानिक मशीन है , इसलिए क्रिया को ‘इलेक्ट्रॉनिक डाटा प्रोसेसिंग’ (Electronic Data Processing) या संक्षेप में ई.डी.पी. (E.D.P.) कहा जाता है .

कंप्यूटरों का महत्त्व (Importance of Computers)

कंप्यूटरों का महत्त्व (Importance of Computers
कंप्यूटरों का महत्त्व (Importance of Computers

आज कल हर आदमी जिसने कंप्यूटर का नाम सुन रखा है , इसका महत्त्व जानता है . बड़ी – बड़ी कम्पनियों और सरकारी दफ्तरों में डाटा को स्टोर करने और उसकी देखभाल करने में तो कंप्यूटर का प्रयोग होता ही है, बिजली और टेलीफोन के बिल बनाने ,बर्थों या सीटों का आरक्षण (Reservation) रेलों में करने जैसे आम जनता के कार्यों में भी कंप्यूटर का बहुत उपयोग होने लगा है. यह दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है. शिक्षा तथा मनोरंजन के क्षेत्रों में भी कंप्यूटरों का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है. वर्तमान व्यस्त दिनचर्या के समय में जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में कंप्यूटरों का प्रयोग अनिवार्य हो गया है, क्योंकि कंप्यूटर से हमारे अमूल्य समय की बचत होती है. दूसरी ओर, आंकड़ों की बढ़ती हुई मात्रा के कारण उनका मानव द्वारा रख रखाव करना जटिल होता जा रहा है. कंप्यूटरों का उपयोग इसीलिए और भी आवश्यक हो गया है.

कंप्यूटर बनाम मनुष्य (Computer vs Human Being)

कंप्यूटर के बहुत से कामों को देखकर आप सोचते होंगे कि इनमें बुद्धि होती होगी, परन्तु वास्तव में कंप्यूटर में एक छोटे कोड़े के बराबर भी बुद्धि नहीं होती. वह केवल दिए गए आदेशों का पालन करता है. इतने से ही वह बहुत से काम कर लेता है, हमें उससे छोटे से छोटा काम कराने के लिए भी पूरे आदेश देने पड़ते हैं, बिना आदेश दिए वह कुछ नहीं कर सकता. यदि हमारे दिए गए आदेश सही होंगे, तो काम भी सही – सही होगा और अगर आदेश गलत होंगे तो काम भी गलत हो जाएगा, कंप्यूटर को सही आदेश देना और उससे बड़े – बड़े कार्य करा लेना भी एक कला है आप इस किताब से यही कला सीखेंगे.

कंप्यूटर के काम करने के तरीके को तुलना हम खुद अपने काम करने के तरीके से कर सकते हैं . हम अपने फानों से सुनकर तथा आंखों से देखकर कोई बात समझते हैं, अपने दिमाग से उस पर विचार करते हैं और उसे याद रखते हैं तथा अपने हाथ – पैर या मुंह से उसका उत्तर देते हैं यानी ऐक्शन (Action) लेते हैं. कंप्यूटर भी लगभग इसी तरह काम करता है. अपनी इनपुट यूनिट से वह डाटा और आदेश लेता है, मैमोरी में उन्हें स्टोर करता है, प्रोसेसर पर उनका पालन करता है और आउटपुट यूनिट पर परिणाम दे देता है. परन्तु मनुष्य और कंप्यूटर में सबसे बड़ा अन्तर यह है कि हमारे काम करने की गति बहुत धीमी होती है, जबकि कंप्यूटर के काम करने की गति बहुत तेज होती है. एण्टनेशनल एजुकेशन ) हिसाब किताब का जो काम हम घंटों में कर पाते हैं, कंप्यूटर उसे सेकेण्डों में कर डालता है.

अंतर यह है कि एक जड़ मशीन होने के कारण कंप्यूटर न तो मनुष्य की तरह थकान अनुभव करते हैं और न ही सकते हैं. बोरियत, यही कारण है कि वे एक – सा कार्य कितनी ही बार उसी गति एवं शुद्धता से बिना एकाग्रता खोए करते है

कंप्यूटर बनाम कैलकुलेटर (Computer vs Calculator)

कंप्यूटर बनाम कैलकुलेटर (Computer vs Calculator)
कंप्यूटर बनाम कैलकुलेटर (Computer vs Calculator)

कुछ लोग कंप्यूटर को एक अच्छी क्वालिटी का कैलकुलेटर ही समझते हैं. ऐसा सोचना सही नहीं है, कैलकुलेटर में हम केवल जोड़ना, घटाना, गुणा करना, भाग देना आदि गणित की क्रियाएं ही कर सकते हैं, परन्तु कंप्यूटर में हस इससे कहीं ज्यादा काम कर सकते हैं . दूसरी बात , कैलकुलेटर हमारे डाटा को स्टोर करके नहीं रख सकता, जबकि कंप्यूटर में डाटा का भण्डार रखा जा सकता है. तीसरी और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि कैलकुलेटर हमारे आदेशों को याद नहीं रख सकता. जितनी बार भी हमें जोड़ने की क्रिया करनी हो, उतनी ही बार हमेंवाला बटन दबाना पड़ता है. लेकिन कंप्यूटर में हम अपने ढेर सारे आदेश (अर्थात प्रोग्राम) भर सकते हैं और आटोमैटिक तरीके से उनका पालन करा सकते हैं.

कंप्यूटर बनाम टाइपराइटर (Computer vs Typewriter)

कंप्यूटर बनाम टाइपराइटर (Computer vs Typewriter)
कंप्यूटर बनाम टाइपराइटर (Computer vs Typewriter)

बहुत से लोग कंप्यूटर को टाइपराइटर का बड़ा भाई या कोई छोटी – मोटी प्रिंटिंग मशीन ही मानते हैं यह बात भी सही नहीं है. टाइपराइटर में हम एक बार टाइप करके अधिक से अधिक एक पेज छपवा सकते हैं , जिसकी 4 या 5 कार्बन कापी भी निकल सकती हैं, परन्तु कंप्यूटर में हम एक बार में सैकड़ों पन्नों की रिपोर्ट छपवा सकते हैं और उसे दोबारा टाइप किए बिना जितनी बार चाहें उतनी बार छपवाया जा सकता है. इससे भी बड़ी बात यह है कि कंप्यूटर में हम किसी रिपोर्ट में अपनी इच्छा से कैसा भी सुधार करके उसे फिर से छपवा सकते हैं. यह कार्य टाइपराइटर में कभी भी नहीं किया जा सकता है 

कंप्यूटर के गुण (Characteristics of Computer)

अब तक आप कंप्यूटर के बहुत से गुणों के बारे में जान गए होंगे . इन्हीं गुणों के कारण कंप्यूटर आजकल मनुष्य का सबसे बड़ा और विश्वास करने योग्य मित्र बन गया है. उसके कुछ मुख्य गुण इस प्रकार हैं- किसी भी काम को बहुत तेज गति से करना, जो और जितना काम बताया जाए वह और उतना ही काम करना, हर काम को पूरी तरह सही – सही करना, अपनी ओर से कोई भूल या गलती न करना, अपना काम बिना रुके बिना किसी मदद के करते रहना, आंकड़ों के भंडार को कम जगह में संग्रह करके रखना तथा आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सरलता से तुरन्त उपलब्ध कराना आदि

कंप्यूटर कैसे कार्य करता है ? (How does Computer Work ?)

कंप्यूटर कोई भी कार्य स्वयं नहीं करता, बल्कि हमारे निर्देश पर किसी प्रोग्राम के अनुसार ही कार्य करता है. प्रत्येक प्रोग्राम को कोई कार्य करने के लिए इनपुट (Input) डाटा की आवश्यकता होती है. हम इनपुट साधनों जैसे की – बोर्ड, माउस, स्कैनर आदि के द्वारा अपना इनपुट डाटा तथा प्रोग्राम कंप्यूटर को देते हैं या भेजते हैं. कंप्यूटर की सी.पी.यू. अथवा प्रोसेसर (Processor) द्वारा हमारे दिए गए आदेशों अर्थात प्रोग्राम का पालन किया जाता है. यह प्रोग्राम इस तरह से लिखा होता है कि उसका ठीक – ठीक पालन करने से कोई काम पूरा हो जाता है. प्रोग्राम का पालन पूरा हो जाने पर अचवा बीच में ही प्रोग्राम का परिणाम अर्थात आउटपुट (Output) किसी आउटपुट साधन जैसे स्क्रीन या प्रिंटर पर भेज दिया जाता है, जिसे हम देख तथा पढ़ सकते हैं. कंप्यूटर के दुसरे फुल फॉर्म्स

इनपुट

कंप्यूटर इनपुट
कंप्यूटर इनपुट

इनपुट के साधनों जैसे की – कीयबोर्ड, माउस, स्कैनर आदि के द्वारा हम अपने निर्देश, प्रोग्राम तथा इनपुट डाटा प्रोसेसर को भेजते हैं.

स्टोरज प्रणाली

भविष्य के प्रयोग के लिए सूचनाओं को भंडारण के माध्यमों जैसे हार्ड डिस्क, फ्लापी डिस्क आदि पर एकत्र किया जा सकता है.

प्रोसेसिंग

प्रोसेसर हमारे निर्देश तथा प्रोग्रामों का पालन करके कार्य सम्पन्न करता है.

आउटपुट

कंप्यूटर आउटपुट
कंप्यूटर आउटपुट

प्रोग्राम का पालन हो जाने पर आउटपुट को स्क्रोन, प्रिंटर आदि साधनों पर दिखा या छाप दिया जाता है.

कंप्यूटर की कार्यप्रणाली

यदि आप प्रोग्राम या आउटपुट या दोनों को भविष्य में प्रयोग करने के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो उन्हें सूचना संचित करने के विशेष साधनों जैसे फ्लापी डिस्क या हार्ड डिस्क पर भेज कर सुरक्षित कर सकते हैं.. 

 

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मुझे उम्मीद है कि आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी जरूर पसंद आया होगा मेरी हमेशा से यही कोशिश रहेगी कि आपको कंप्यूटर क्या है ? इसके प्रकार एवं विशेषताएं इसकी परिभाषा, अर्थ और कार्य के विषय में पूरी जानकारी प्रदान की जा सके जिससे उन्हें किसी दूसरे साइड या इंटरनेट में उस के संदर्भ में खोजने की जरूरत ना पड़े

जिससे उनकी समय की बचत भी हो सके और एक ही जगह पर उन्हें सभी Computer से जुड़ी पूरी जानकारी प्राप्त हो सके जैसे कि  डाटा (Data) क्या है ?, कंप्यूटरों का महत्त्व (Importance of Computers),कंप्यूटर बनाम मनुष्य (Computer vs Human Being) आदि के बारे में यदि आपके मन में इस आर्टिकल को लेकर कोई भी डाउट है या आप चाहते हैं कि इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तो आप comments बॉक्स में बता सकते हैं

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